दिल तोड़ के ना जा सानिया- भारत

गुरुवार, अप्रैल 01, 2010

सानिया तुमने भारत में रहने वाले हर भारतीय नौजवान का दिल तोड़ दिया। तुम कैसे किसी और की हो सकता है, और वो भी किसी पाकिस्तानी की। क्या भारत में तुम्हारे लायक कोई नहीं बचा था। तुम्हारे जीतने पर हम कितना खुश होते थे। तुम शादी कर रही हो हमारे लिये तो ये ही काफी है दिल तोड़ने के लिये लेकिन तुमने तो हर भारतीय का दिल तोड़ा है। तुम शोहराब से शादी करने वाली थी, हमें सुकुन हुआ कि चलों कि तुम किसी भारतीय से शादी कर रही हो लेकिन तुमने तो पाकिस्तान के क्रिकेट कप्तान शोएब मलिक को अपना मान लिया। अरे ये वही पाकिस्तानी है तो किसी के नहीं हुए, तो तुम्हारे कैसे हो सकते है।


रही बात शोएब मलिक की तो तुम्हारी ही तरह हैदराबाद की रहने वाली आएशा सिद्दीकी को शादी का वादा करके धोखा दिया है। और तुम्हे  बता दूं कि इसी शोएब ने उसे तलाक तक नहीं दिया है। तुम शादी तो कर लोगी लेकिन उसके बाद तुम्हारा क्या होगा। आखिर तो तुम पर हमारा भी कोई हक है।तुम देश की इज्जत हो, तुमने कई बार देश के लिये सम्मान बढ़ाया है। तो अपनी जि़दगी को क्यो बर्बाद कर रही हो। आएशा के पिता ने तो शोएब पर धोखधड़ी का केस डालने जा रहे है, कम से कम अब तो समझों कि ये शोएब मलिक किसा का नहीं है। ये तो तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना है, क्योंकि मै समझ सकता हूं, मैने आयशा की एक तस्वीर देखी थी तुमसे अच्छी नहीं दिखती है। लेकिन शादी के बाद तो तुम्हारी खूबसूरती जब ढल जायेगी तब क्या होगा। तब उसका प्यार किसी तीसरी के चक्कर में पड़ जायेगा फिर। फिर तुम तो उसकी दूसरी पत्नी ही कहलाओगी। अरे अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है, मेहनत करो खूब खेलो, टेनिस में और पदक जीतो, तुम्हारे लिये कई युवा हाथों में दिल लिये खड़े रहेंगे। फिर पाकिस्तान के इस नामाकूल खिलाड़ी जिसपर मैच फिक्सिंग तक के आरोप लगे है उसके साथ जीवन बिताने का क्या लाभ।

शोहराब तुम्हारे बचपन का दोस्त था। तुमने उसे छोड़ा हमने मान लिया कि चलो कोई बात नहीं, बचपन का दोस्त अच्छा पति बने ये किसी किताब में तो नहीं लिखा लेकिन शोएब मलिक, ये कहां से पसंद आ गया । कम से कम देश के दुश्मन राष्ट्रों के लोगों से तो विवाह मत करों। हमारा दिल  तुमने इसलिये नहीं तोड़ा कि तुम शादी कर रही हो बल्कि इस लिये तोड़ा है कि तुम पाकिस्तान जा रही हो। अब तुम ये न कहना कि तुम पाकिस्तान में नहीं रहोगी, अरे तुम रहो या न रहो तुम्हारा ससुराल तो पाकिस्तान ही होगा। और तुम वहा बिलकुल सुरक्षित नहीं रहोगी। जिस तरह तुम्हारे स्कर्ट पहनने पर यहां का हम सब और  मीडिया मुस्लिम धर्मगुरुओं के कपड़े उतार लेता है, वैसा पाकिस्तान में नहीं होता है। वहां तो तुम्हे बुर्के में ही रहना होगा, और कोई तुम्हारे मनपसंद कपड़े नहीं पहनने देगा। वो तो भारत के लोग है जो तुम्हारे खेल को समझते है, इसलिये स्कर्ट पहनने पर तुम्हारे साथ उठ खडे़ हुए है,सुसराल गेंदा फूल है वहां नहीं सुनी जायेगी किसी की।

मेरी मानों किसी से भी शादी करो लेकिन देश के बाहर मत जाओ, क्योंकि तुम्हारे जाने से ही देश का दिल टूट जायेगा, भले ही तुम कितना भी कहों कि तुम भारत के लिये खेलोगी लेकिन तुम्हारे ससुराल वाले नहीं मानेंगे।
अब भी वक्त है, शोएब से खुद को बचाओ, किसी भारतीय से शादी कर लो अगर करनी है तो। यहां तो उससे भी कई टैलेंटेड क्रिकेटर हैं, इरफान है, युसुफ है,कैफ है, युवराज है धौनी है, किसी से कर लो यार, कहां पाकिस्तान जाने की फिराक में हो। वहां क्या मिलेगा, सिवाय दिनभर धमाकों की आवाजों के।और पिता के दबाव में मत आना हम तुम्हारे प्रशंसक हैं फिर से हर बार की तरह तुम्हारे साथ खड़े हो जायेगें तुम एक बार आवाज लगा के तो देखों, मगर मत जाओ......

11 टिप्पणियाँ:

आदर्श राठौर ने कहा…

आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं।

Suman ने कहा…

nice

darshanbaweja ने कहा…

पाकिस्तानी तो किसी के नहीं हुए|

Vivek Rastogi ने कहा…

पता नहीं अच्छा है या नहीं पर पाकिस्तानी पर सहज विश्वास नहीं होता ।

S B Tamare ने कहा…

जनाब
शुक्ला जी !
बड़ा ही बेबाक और साफगोई भरा पत्र सानिया के नाम लिख डाला है आपने, जो ख़ास तौर पर मुझे खूब पसंद आया /
मेरा भी ख्याल क्या पुख्ता यकींन है कि सानिया का ये कदम निहायत ही ना-तजुर्बेकारी और गैर-दानिशमंदी भरा है जिसका खामियाजा निसंदेह सानिया को भुगतना पड़ सकता है /

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

सुशीला पुरी ने कहा…

बेहद भावना मे आपने लिखा है और मै आपके भावों की कद्र करती हूँ ...

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

बात में तो दम है..पर हर किसी की जिंदगी और सोचने का नजरिया.

_________
"शब्द-शिखर" पर सुप्रीम कोर्ट में भी महिलाओं के लिए आरक्षण

Dev ने कहा…

यू तो प्रेम को किसी धर्म, सम्प्रदाय या मुल्क की जन्ज्जीरों में नहीं जकड़ा जाना चाहिए
परन्तु भारत पाक सम्बन्ध हमें कुछ ऐसा सोचने पर मजबूर करते है
यह निकाह सानिया की तरफ से ऐसी सोच से परे भारतीय पहल है जिसका हमे स्वागत करना चाहिए

अबयज़ ख़ान ने कहा…

शशांक, सानिया से शिकवे तो मुझे भी बहुत हैं.. लेकिन इतना दर्द देखकर अब अपना दर्द कहा नहीं जाता.. वैसे हर किसी को अपनी ज़िंदगी का फैसला लेने का पूरा हक है.. हम किसी को सलाह देने वाले कौन हो सकते हैं.. हो सकता है, कि ये शादी दो बिछुड़े हुए भाईयों को अमन के रास्ते पर ही ले आए..

वैसे तुम्हारे साथ पूरी हमदर्दी है..

बी. एन. शुक्ल ने कहा…

क्यों दिमाग खपाते हो, इनके दिलो दिमाग कभी न बदलेंगे।

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